07 November 2010

Barsat

Mittee ki saundhi si khushboo udi hai jahan me,
aaj khet par megh baras gaya jaise,
aur teen tar-ba-tar kar gaya jaise,

baarishe kabhi bhi ho jaati hai aajkal,
rone ko koi mudda jaroori to nahi,
aankhen yun bhi baras padti hai kabhi kabhi...

09 February 2009

हाईकू

चाँद जुलाहा
रात सफेद परी
पूनम हुई

***


बना शहर
दरख्त मारे गए
गुम जंगल

***

मुझमे तू है
या कि तुझमे हूँ मैं
उलझन है

***


मंजिल क्या है
चंद कदम दूरी
कुछ तो चलो

09 January 2009

पांडिचेरी

पांडिचेरी से गले मिल समंदर गुजरता है
अरविंदो आश्रम पे वक्त आ ठहरता है
हवाएँ सीली जिस्म छू जाती है
रूह तक दस्तक उनकी जाती है
अरोविले में भूल जाते है लोग मजहब -ओ -वतन
हर रंग से रोशन है वहाँ का चमन
पांडिचेरी से गले मिल समंदर गुजरता है

07 November 2008

अपने -अपने पिंजरे

सबके अपने अपने पिंजरे है
द्वार अपने अपने,
सब है कैद,
सलाखों से देखते है तो स्वतंत्र जान पड़ते है
पर होते नही,
सबके अपने अपने पिंजरे है

02 November 2008

रिश्ते नाते सब खोखले हो गए है
लोग अपने ही दोगले हो गए है

03 August 2008

जिनके बाजू नहीं होते
ज्यादा बोझ उठाते है,
खो देते है जो आँखे
देख लेते है रूह भी ,
बिन कानो के
दिल की बातें सुन लेते है लोग,
जहां उम्मीद नहीं होती
वही उम्मीद पलती है.

अहसास

अहसास जल रहे है
अहसास मर रहे है
अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए
चलो कुछ देर
आँखों का कचरा साफ़ कर ले

दिमाग की धूल पोंछे
दिल को हरा कर ले

चलो कुछ देर
कुछ अपने, कुछ पराये ग़मो पे रो ले

अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए