२ शेर
उजाला जो दिल में लिए चलते हैं
सफर में उनके रात नही होती
वो दुनियाभर की बाते तो करते हैं
मेरी अपनी पर बात नही होती
15 November 2007
05 November 2007
अकेले शेर
कुछ खुद का,कुछ जमाने का ख्याल रखते है
कुछ वहम ऐसे ही दिल में पाल रखते है
**
ये जिन्दगी तो बस गुज़र गयी यूं ही
इक जन्म और लूँ जीने के वास्ते
**
मैं क्या करूं मुझसे ये नफरत नही होती
कम दुश्मनों से भी मुहब्बत नही होती
**
पर फैला-फैला के बैठ जाते हैं पिंजरे में
क्या हैं बुरा कोशिशें तो करते हैं पिंजरे में
कुछ खुद का,कुछ जमाने का ख्याल रखते है
कुछ वहम ऐसे ही दिल में पाल रखते है
**
ये जिन्दगी तो बस गुज़र गयी यूं ही
इक जन्म और लूँ जीने के वास्ते
**
मैं क्या करूं मुझसे ये नफरत नही होती
कम दुश्मनों से भी मुहब्बत नही होती
**
पर फैला-फैला के बैठ जाते हैं पिंजरे में
क्या हैं बुरा कोशिशें तो करते हैं पिंजरे में
30 October 2007
हरसूद
डूब चुका इक शहर
डूब चुका वर्तमान
रह गया इतिहास बाकी
नाम था हरसूद जिसका
आगोश में समा गया नर्मदा के
मोक्ष पा लेगा शायद
डूब चुका वर्तमान
रह गया इतिहास बाकी
नाम था हरसूद जिसका
आगोश में समा गया नर्मदा के
मोक्ष पा लेगा शायद
12 October 2007
तैयारी
दीवाली आ रही है
चलो कुछ तैयारी कर ले
कुछ दीपक,कुछ बातियां,
कुछ आतिशबाजियां,
और सुरक्षा बहुत
शहर में हो सकते है दंगे
चलो कुछ तैयारी कर ले
कुछ दीपक,कुछ बातियां,
कुछ आतिशबाजियां,
और सुरक्षा बहुत
शहर में हो सकते है दंगे
16 September 2007
बाज़ार
बाज़ार की परिभाषा बदल गयी है इन दिनों
बाज़ार वह नही जहाँ जरूरतें पूरी हो
बाज़ार वह है जहाँ जरूरतें पैदा हो
बाज़ार वह नही जहाँ जरूरतें पूरी हो
बाज़ार वह है जहाँ जरूरतें पैदा हो
06 July 2007
Poetry 4
वक़्त-१
वक़्त न होता गर
ज़ख्म हमारे भरता कौन
वक़्त-२
वक़्त सिखा देता है
सलीका जीने का
वक़्त-३
लिबास बदल देता है वक़्त
बचपन ,बुढ़ापा और ज़वानी
वक़्त-४
वक़्त आता है कभी, जाता है कभी
उम्र भर तो ठहरता नही
वक़्त न होता गर
ज़ख्म हमारे भरता कौन
वक़्त-२
वक़्त सिखा देता है
सलीका जीने का
वक़्त-३
लिबास बदल देता है वक़्त
बचपन ,बुढ़ापा और ज़वानी
वक़्त-४
वक़्त आता है कभी, जाता है कभी
उम्र भर तो ठहरता नही
27 May 2007
Poetry 1
जहाँ भर की लो तलाशी
कि गुम है इंसान इन दिनों
०००
जीते जी कब किसी को नज़र मे रखती है
बाद मरने के ये दुनिया खबर मे रखती है
०००
कि गुम है इंसान इन दिनों
०००
जीते जी कब किसी को नज़र मे रखती है
बाद मरने के ये दुनिया खबर मे रखती है
०००
कुछ भी कहा , न कुछ भी सुना
क्या-क्या कह-सुन वो गए है
घरों मे घरों जैसी बात नहीं अब
कहीं छत तो कहीं इंसान नहीं अब
०००
अच्छे लोग भटकते नही रात को
फिर ये चांद भटकता क्यों है
०००
Poetry 2
हाथों मे हसरतों के खिलौना है आदमी
देखिए यूं तो आज भी बौना है आदमी
०००
जूड़ा खोल ज़ुल्फ़ें शाने पे आई होगीं
बदलियाँ यूं ही न आसमां पे छाई होगीं
देखिए यूं तो आज भी बौना है आदमी
०००
जूड़ा खोल ज़ुल्फ़ें शाने पे आई होगीं
बदलियाँ यूं ही न आसमां पे छाई होगीं
Poetry 3
दुआ किसी को मिलती है
दवा किसी को मिलती है
गुनाह कोई करता है
सज़ा किसी को मिलती है
पैदा हो इससे पहले ही
कज़ा किसी को मिलती है
दवा किसी को मिलती है
गुनाह कोई करता है
सज़ा किसी को मिलती है
पैदा हो इससे पहले ही
कज़ा किसी को मिलती है
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