15 November 2007

शेर

उजाला जो दिल में लिए चलते हैं
सफर में उनके रात नही होती
वो दुनियाभर की बाते तो करते हैं
मेरी अपनी पर बात नही होती

05 November 2007

अकेले शेर

कुछ खुद का,कुछ जमाने का ख्याल रखते है

कुछ वहम ऐसे ही दिल में पाल रखते है
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ये जिन्दगी तो बस गुज़र गयी यूं ही

इक जन्म और लूँ जीने के वास्ते
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मैं क्या करूं मुझसे ये नफरत नही होती

कम दुश्मनों से भी मुहब्बत नही होती
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पर फैला-फैला के बैठ जाते हैं पिंजरे में
क्या हैं बुरा कोशिशें तो करते हैं पिंजरे में