२ शेर
उजाला जो दिल में लिए चलते हैं
सफर में उनके रात नही होती
वो दुनियाभर की बाते तो करते हैं
मेरी अपनी पर बात नही होती
15 November 2007
05 November 2007
अकेले शेर
कुछ खुद का,कुछ जमाने का ख्याल रखते है
कुछ वहम ऐसे ही दिल में पाल रखते है
**
ये जिन्दगी तो बस गुज़र गयी यूं ही
इक जन्म और लूँ जीने के वास्ते
**
मैं क्या करूं मुझसे ये नफरत नही होती
कम दुश्मनों से भी मुहब्बत नही होती
**
पर फैला-फैला के बैठ जाते हैं पिंजरे में
क्या हैं बुरा कोशिशें तो करते हैं पिंजरे में
कुछ खुद का,कुछ जमाने का ख्याल रखते है
कुछ वहम ऐसे ही दिल में पाल रखते है
**
ये जिन्दगी तो बस गुज़र गयी यूं ही
इक जन्म और लूँ जीने के वास्ते
**
मैं क्या करूं मुझसे ये नफरत नही होती
कम दुश्मनों से भी मुहब्बत नही होती
**
पर फैला-फैला के बैठ जाते हैं पिंजरे में
क्या हैं बुरा कोशिशें तो करते हैं पिंजरे में
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