सबके अपने अपने पिंजरे है
द्वार अपने अपने,
सब है कैद,
सलाखों से देखते है तो स्वतंत्र जान पड़ते है
पर होते नही,
सबके अपने अपने पिंजरे है
07 November 2008
03 August 2008
अहसास
अहसास जल रहे है
अहसास मर रहे है
अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए
चलो कुछ देर
आँखों का कचरा साफ़ कर ले
दिमाग की धूल पोंछे
दिल को हरा कर ले
चलो कुछ देर
कुछ अपने, कुछ पराये ग़मो पे रो ले
अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए
अहसास मर रहे है
अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए
चलो कुछ देर
आँखों का कचरा साफ़ कर ले
दिमाग की धूल पोंछे
दिल को हरा कर ले
चलो कुछ देर
कुछ अपने, कुछ पराये ग़मो पे रो ले
अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए
01 August 2008
हर तरफ बंद
हर तरफ़ "बंद" है,और खुला है आतंक
जीवन के द्वार पहरा देती मौत
कुछ दिन का शोक मना हम
भूले क्यों,किसने,कैसे
रचा तबाही का स्वयंवर
हर तरफ़ "बंद" है,और खुला है आतंक
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