03 August 2008

जिनके बाजू नहीं होते
ज्यादा बोझ उठाते है,
खो देते है जो आँखे
देख लेते है रूह भी ,
बिन कानो के
दिल की बातें सुन लेते है लोग,
जहां उम्मीद नहीं होती
वही उम्मीद पलती है.

अहसास

अहसास जल रहे है
अहसास मर रहे है
अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए
चलो कुछ देर
आँखों का कचरा साफ़ कर ले

दिमाग की धूल पोंछे
दिल को हरा कर ले

चलो कुछ देर
कुछ अपने, कुछ पराये ग़मो पे रो ले

अहसास जलने न पाए
अहसास मरने न पाए

माँ

माँ लगती है छोटी सी बच्ची कभी-कभी
छोटी कोई बच्ची भी माँ सी लगती है कभी-कभी

01 August 2008

हर तरफ बंद

हर तरफ़ "बंद" है,और खुला है आतंक

जीवन के द्वार पहरा देती मौत

कुछ दिन का शोक मना हम

भूले क्यों,किसने,कैसे

रचा तबाही का स्वयंवर

हर तरफ़ "बंद" है,और खुला है आतंक