07 November 2008

अपने -अपने पिंजरे

सबके अपने अपने पिंजरे है
द्वार अपने अपने,
सब है कैद,
सलाखों से देखते है तो स्वतंत्र जान पड़ते है
पर होते नही,
सबके अपने अपने पिंजरे है

02 November 2008

रिश्ते नाते सब खोखले हो गए है
लोग अपने ही दोगले हो गए है