चाँद जुलाहा
रात सफेद परी
पूनम हुई
***
बना शहर
दरख्त मारे गए
गुम जंगल
***
मुझमे तू है
या कि तुझमे हूँ मैं
उलझन है
***
मंजिल क्या है
चंद कदम दूरी
कुछ तो चलो
09 February 2009
09 January 2009
पांडिचेरी
पांडिचेरी से गले मिल समंदर गुजरता है
अरविंदो आश्रम पे वक्त आ ठहरता है
हवाएँ सीली जिस्म छू जाती है
रूह तक दस्तक उनकी जाती है
अरोविले में भूल जाते है लोग मजहब -ओ -वतन
हर रंग से रोशन है वहाँ का चमन
पांडिचेरी से गले मिल समंदर गुजरता है
अरविंदो आश्रम पे वक्त आ ठहरता है
हवाएँ सीली जिस्म छू जाती है
रूह तक दस्तक उनकी जाती है
अरोविले में भूल जाते है लोग मजहब -ओ -वतन
हर रंग से रोशन है वहाँ का चमन
पांडिचेरी से गले मिल समंदर गुजरता है
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