पांडिचेरी से गले मिल समंदर गुजरता है
अरविंदो आश्रम पे वक्त आ ठहरता है
हवाएँ सीली जिस्म छू जाती है
रूह तक दस्तक उनकी जाती है
अरोविले में भूल जाते है लोग मजहब -ओ -वतन
हर रंग से रोशन है वहाँ का चमन
पांडिचेरी से गले मिल समंदर गुजरता है
09 January 2009
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1 comment:
podicherry ke samandar ki tarah apki kavita bhi maan ko bheego jaati hai. peaceful puducherry.
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